दिल की आवाज़
अध्याय 3 / 5

अध्याय 3: रुकावटें

जब गीता के पिताजी को पता चला तो उन्होंने उसे घर में बंद कर दिया। "वो शहर का है, उसकी ज़िम्मेदारी नहीं है। तुम्हारी शादी हमारी पसंद के लड़के से होगी।" गीता रोई, पर उसने हार नहीं मानी। विक्रम ने उसे ख़िड़की से पत्र भेजे। "मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगा।" पर समय कम था। विक्रम को दिल्ली वापस जाना था।

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