अध्याय 2: छुपी मुलाकातें
विक्रम एक महीने के लिए जोधपुर में रहा। वो रोज़ गीता के घर के पास से गुज़रता। गीता भी उसे देखने लगी। एक दिन दोनों की बात हुई। विक्रम ने कहा, "तुम बहुत अलग हो।" गीता ने पूछा, "कैसे?" विक्रम बोला, "तुम्हारी आँखों में सपने हैं।" दोनों रोज़ मिलने लगे। एक पुरानी हवेली के पीछे छुपकर बातें होतीं। प्यार पल-पल बढ़ता गया।