अध्याय 5: गौरव का झंडा
एक साल बाद सुरेंद्र की पोस्टिंग खत्म हुई। वो वापस अपने गाँव गया। विक्रम भी उसके साथ था। दोनों ने मिलकर गाँव में एक स्कूल खोला। बच्चों को पढ़ाने लगे। पर सुरेंद्र फिर से सेना में लौट गया। उसने कहा, "मेरा घर अब सीमा पर है।" आज भी सियाचिन पर भारतीय तिरंगा फहरा रहा है। सुरेंद्र जैसे जवानों की वजह से। वो कहते हैं, "सरहद की मिट्टी में एक जादू है। यह हमें जोड़े रखती है।"