अध्याय 3: दोस्ती की गाँठ

सुरेंद्र का सबसे करीबी दोस्त था नायक विक्रम। दोनों एक ही गाँव के थे। उन्होंने साथ में भर्ती हुई थी। सियाचिन में भी साथ थे। एक दिन विक्रम ने कहा, "सुरेंद्र, जब वापस जाएँगे, तो अपने गाँव में एक स्कूल खोलेंगे।" सुरेंद्र ने कहा, "ज़रूर। बच्चों को पढ़ाएँगे।" वो दोनों अपने सपनों के बारे में बात करते। यही सपने उन्हें जिंदा रखते थे।

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