अध्याय 5: दिव्य दर्शन

एक साल बाद, शिवरात्रि की रात। रुद्र बर्फ़ में बैठा था। अचानक उसे एक दिव्य आभा दिखी। आकाश में एक चमकती आकृति प्रकट हुई। भगवान शिव। रुद्र की आँखों से आँसू बह निकले। शिव ने कहा, "तुमने मुझे बाहर नहीं, भीतर खोजा। यही सच्ची तपस्या है।" अगली सुबह रुद्र वहाँ से चल पड़ा। उसके चेहरे पर एक दिव्य चमक थी। वो दुनिया में फैलाने गया - प्यार, करुणा और सत्य।

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