अध्याय 4: अहंकार का अंत
छह महीने बीत गए। रुद्र अब बहुत कमज़ोर था। एक साधु वहाँ से गुज़रा। उसने कहा, "बेटा, तुम बहुत तप किया। पर तुम्हें अभी भी अहंकार है। तुम सोचते हो कि तुम कुछ कर रहे हो।" रुद्र ने सोचा और समझा। उसने अपना अहंकार त्याग दिया। उसने कहा, "मैं कुछ नहीं हूँ। सब उनकी कृपा है।" उसी पल उसके मन में शांति आई।