सपनों का महल
अध्याय 5 / 5

अध्याय 5: महल की रोशनी

दीवाली की रात, पूरा महल रोशनी से जगमगा रहा था। विक्रम अपनी नई पत्नी के साथ था। आर्य ने घर वापस आने का फ़ैसला किया। कबीर अपने माता-पिता की सेवा कर रहा था। दिव्या की किताब की सफलता ने परिवार को गर्व से भर दिया। राज जी ने कहा, "यह महल सिर्फ ईंट-पत्थर का नहीं है, यह हमारे सपनों का घर है।" सबने मिलकर पूजा की। उस रात महल में फिर से हँसी और खुशी की लहर थी। परिवार फिर से एक हो गया था।

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