अध्याय 2: चाँदनी रात का वादा
रात का समय था। पूर्णिमा का चाँद आसमान में चमक रहा था। गाँव के किनारे नदी के किनारे बैठे थे दोनों। पानी में चाँद की परछाईं थी, और उनकी आँखों में एक-दूसरे का अक्स। राहुल ने कहा, "जो भी होगा, मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगा।" प्रिया के गाल पर आँसू की बूँदें थीं। उसने कहा, "यह वादा है चाँद की गवाही में।" वो रात उन दोनों के लिए अमर हो गई। नदी की लहरें भी उनकी कहानी सुन रही थीं।